जय माता दी 💐🙏🏻

अद्भुत और गोपनीय हैं मां भगवती के 32 नाम, नवरात्रि या अष्टमी अथवा नित्य नियम पूर्वक अवश्य पढ़ें और माता की कृपा प्राप्त करें 💐🙏🏻

घोर विपत्ति दूर करेगा माता के 32 नामों का यह अमोघ उपाय

दुर्दांत दानव महिषासुर के वध से प्रसन्न और निर्भय हो गए त्रिदेवों सहित देवताओं ने जब प्रसन्न भगवती माता से ऐसे किसी अमोघ उपाय की याचना की, जो सरल हो और कठिन से कठिन विपत्ति से छुड़ाने वाला हो।

तब कृपालु भगवती ने अपने ही बत्तीस नामों (32) की माला के एक अद्भुत गोपनीय रहस्यमय किंतु चमत्कारी जप का उपदेश किया जिसके करने से घोर से घोर विपत्ति, राज्यभय या दारुण विपत्ति से ग्रस्त मनुष्य भी भयमुक्त एवं सुखी हो जाता है।

ऐसे करें 32 नामों का दुर्लभ प्रयोग –

1-दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के बाद देहशुद्धि करके कुश या कम्बल के आसन पर बैठें।

2- पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करें।

3- घी के दीपक जलाएं।

4- श्रद्धा भाव से मां भगवती के इन नामों की 5, 11 या 21 माला नवरात्रि के नौ दिनों तक अथवा दुर्गाष्टमी में जपें और जगत माता से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की याचना करें। आपकी मनोकामना अवश्‍य पूर्ण होंगी।

यहां पर एक विशेष ध्यान देने वाली बात यह है कि कृपा उन्हीं लोगों पर होती है जो कृपा पात्र होते हैं ,कृपा पात्र वे होते हैं जिनमें  दया धर्म  अर्थात् श्रद्धा, विश्वास ,परोपकार का भाव एवं गौ ब्राहमण साधु सन्तों ,माता पिता गुरुजनों के प्रति श्रद्धा सेवा भाव होता है । जो अपने मनुष्य जीवन के कर्तव्यों, दायित्वों का सही पालन करते हैं । फिरभी कठिनाइयां हों तब उक्त प्रयोग साधनों से भगवती भगवान की कृपा प्राप्त होती है ।

मां भगवती श्री दुर्गा जी के चमत्कारी बत्तीस नाम –

1-दुर्गा

2-दुर्गार्तिशमनी

3-दुर्गापद्विनिवारिणी।

4-दुर्गमच्छेदिनी

5-दुर्गसाधिनी

6-दुर्गनाशिनी॥

7-दुर्गतोद्धारिणी

8-दुर्गनिहन्त्री

9-दुर्गमापहा।

10-दुर्गमज्ञानदा

11- दुर्गदैत्यलोकदवानला॥

12-दुर्गमा

13-दुर्गमालोका

14-दुर्गमात्मस्वरूपिणी।

15-दुर्गमार्गप्रदा

16-दुर्गमविद्या

17-दुर्गमाश्रिता॥

18-दुर्गमज्ञानसंस्थाना

19-दुर्गमध्यानभासिनी।

20-दुर्गमोहा

21-दुर्गमगा

22-दुर्गमार्थस्वरूपिणी॥

23-दुर्गमासुरसंहन्त्री

24-दुर्गमायुधधारिणी।

25-दुर्गमाङ्गी

26-दुर्गमता

27-दुर्गम्या

28- दुर्गमेश्वरी॥

29-दुर्गभीमा

30-दुर्गभामा

31-दुर्गभा

32-दुर्गदारिणी।

नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानवः॥

पठेत् सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः॥